अपरिज्ञानमेतत् ते महान्तं धर्ममिच्छत:।
न हि यज्ञे पशुगणा विधिदृष्टा: पुरंदर॥ १३॥
अनुवाद
पुरन्दर! यद्यपि तुम महान धर्म की इच्छा रखते हो, फिर भी तुम अपनी अज्ञानता के कारण पशुवध करने को तत्पर हो; क्योंकि यज्ञ में पशुवध शास्त्रों में विधिपूर्वक नहीं किया गया है॥13॥
Purandara! Even though you desire great righteousness, it is due to your ignorance that you are ready to slaughter animals; because the slaughter of animals in sacrifices is not prescribed in the scriptures.॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥