श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना  »  श्लोक 90-91
 
 
श्लोक  14.90.90-91 
क्षुधा निर्णुदति प्रज्ञां धर्मबुद्धिं व्यपोहति॥ ९०॥
क्षुधापरिगतज्ञानो धृतिं त्यजति चैव ह।
बुभुक्षां जयते यस्तु स स्वर्गं जयते ध्रुवम्॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
भूख मनुष्य की बुद्धि का नाश कर देती है। वह धार्मिक विचारों को मिटा देती है। भूख के कारण ज्ञान नष्ट हो जाता है और मनुष्य धैर्य खो देता है। जो भूख को जीत लेता है, वह निश्चय ही स्वर्ग को जीत लेता है॥ 90-91॥
 
‘Hunger destroys man's intellect. It erases religious thoughts. Due to hunger, knowledge is lost and man loses patience. He who conquers hunger, definitely conquers heaven.॥ 90-91॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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