श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  14.90.69 
तव प्रसादान्निर्वृत्ता मम लोका: किलाक्षया:।
पुत्रेण तानवाप्नोति यत्र गत्वा न शोचति॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
आपकी कृपा से मैंने सनातन लोक प्राप्त किया है। पुत्र के द्वारा मनुष्य उन लोकों में जाता है जहाँ उसे कभी शोक नहीं करना पड़ता॥69॥
 
‘By your grace I have attained the eternal world. Through a son a man goes to those worlds where he never has to grieve.॥ 69॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)