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श्री महाभारत
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पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
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अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना
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श्लोक 40
श्लोक
14.90.40
इत्युक्त: प्रतिगृह्याथ सक्तूनां कुडवं द्विज:।
भक्षयामास राजेन्द्र न च तुष्टिं जगाम स:॥ ४०॥
अनुवाद
राजेन्द्र! ब्राह्मण की यह बात सुनकर अतिथि ने एक सेर सत्तू उठाकर खा लिया; परन्तु उससे उसकी तृप्ति नहीं हुई।
Rajendra! On hearing the Brahmin say this, the guest took a pound of sattu and ate it; but he was not satisfied with that.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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