Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.89.44: भरतश्रेष्ठ राजा युधिष्ठिर ने उस यज्ञ में धन-धान्य की वर्षा की। उन्होंने सभी प्रकार की कामनाओं, रत्नों और रसों की भी वर्षा की। इस प्रकार पापों से मुक्त और तृप्त होकर वे अपने नगर में प्रवेश कर गए। 44। | mahabharat अध्याय 14.89: युधिष्ठिरका ब्राह्मणोंको दक्षिणा देना और राजाओंको भेंट देकर विदा करना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भरतश्रेष्ठ राजा युधिष्ठिर ने उस यज्ञ में धन-धान्य की वर्षा की। उन्होंने सभी प्रकार की कामनाओं, रत्नों और रसों की भी वर्षा की। इस प्रकार पापों से मुक्त और तृप्त होकर वे अपने नगर में प्रवेश कर गए। 44।
The best of the Bharatas, King Yudhishthira, showered wealth in that sacrifice. He also showered all kinds of wishes, gems and juices. Thus, free from sins and fulfilled, he entered his city. 44.
इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अनुगीतापर्वणि अश्वमेधसमाप्तौ एकोननवतितमोऽध्याय:॥ ८९॥
इसप्रकार श्रीमहाभारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अनुगीतापर्वमें अश्वमेधकी समाप्तिविषयक नवासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८९॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥