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mahabharat 14.89.41: (पीपल और सोंठ को मिलाकर बनाए गए मूंग के रस को 'खांडव' कहते हैं। यदि उसमें चीनी मिला दी जाए तो उसे 'खांडवरग' कहते हैं।) वहाँ के लोग बनाए और खाए जाने वाले खाद्य पदार्थों और खांडवरग की मात्रा तथा वहाँ बंधे हुए पशुओं की संख्या की कोई सीमा नहीं देख सकते थे॥ 41॥   |   mahabharat अध्याय 14.89: युधिष्ठिरका ब्राह्मणोंको दक्षिणा देना और राजाओंको भेंट देकर विदा करना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 89: युधिष्ठिरका ब्राह्मणोंको दक्षिणा देना और राजाओंको भेंट देकर विदा करना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  14.89.41 
भक्ष्यखाण्डवरागाणां क्रियतां भुज्यतां तथा।
पशूनां बध्यतां चैव नान्तं ददृशिरे जना:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
(पीपल और सोंठ को मिलाकर बनाए गए मूंग के रस को 'खांडव' कहते हैं। यदि उसमें चीनी मिला दी जाए तो उसे 'खांडवरग' कहते हैं।) वहाँ के लोग बनाए और खाए जाने वाले खाद्य पदार्थों और खांडवरग की मात्रा तथा वहाँ बंधे हुए पशुओं की संख्या की कोई सीमा नहीं देख सकते थे॥ 41॥
 
(The juice of green gram prepared by mixing peepal and dried ginger is called 'Khandava'. If sugar is mixed in it then it is called 'Khandavarag'.) The people there could not see any limit to the quantity of edible items and Khandavarag prepared and eaten and the number of animals tied there.॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)