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mahabharat 14.89.36: इन्द्रियों को वश में करने वाले कौरवराज युधिष्ठिर ने सब राजाओं को खूब धन दिया, उनका विशेष सत्कार किया और फिर उन्हें विदा किया ॥36॥   |   mahabharat अध्याय 14.89: युधिष्ठिरका ब्राह्मणोंको दक्षिणा देना और राजाओंको भेंट देकर विदा करना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 89: युधिष्ठिरका ब्राह्मणोंको दक्षिणा देना और राजाओंको भेंट देकर विदा करना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  14.89.36 
नृपतींश्चैव तान् सर्वान् सुविभक्तान् सुपूजितान्।
प्रस्थापयामास वशी कुरुराजो युधिष्ठिर:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
इन्द्रियों को वश में करने वाले कौरवराज युधिष्ठिर ने सब राजाओं को खूब धन दिया, उनका विशेष सत्कार किया और फिर उन्हें विदा किया ॥36॥
 
Yudhishthira, the king of Kurus, who had controlled his senses, gave ample money to all the kings, honoured them specially and then sent them off. ॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)