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श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 89: युधिष्ठिरका ब्राह्मणोंको दक्षिणा देना और राजाओंको भेंट देकर विदा करना  »  श्लोक 3-4h
 
 
श्लोक  14.89.3-4h 
उद्‍धृत्य तु वपां तस्य यथाशास्त्रं द्विजातय:॥ ३॥
श्रपयामासुरव्यग्रा विधिवद् भरतर्षभ।
 
 
अनुवाद
इसके बाद ब्राह्मणों ने शांत मन से घोड़े की चर्बी निकाली और उसे विधि-विधान से अर्पित करना शुरू कर दिया।
 
After this, the Brahmins with calm mind took out the fat of the horse and started offering it as per the rituals.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)