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mahabharat 14.89.24-25: यज्ञवेदी में जो भी स्वर्ण या स्वर्ण के आभूषण, तोरण, यूप, घड़े, पात्र और ईंटें थीं, उन्हें भी युधिष्ठिर की अनुमति से ब्राह्मणों ने आपस में बांट लिया।   |   mahabharat अध्याय 14.89: युधिष्ठिरका ब्राह्मणोंको दक्षिणा देना और राजाओंको भेंट देकर विदा करना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 89: युधिष्ठिरका ब्राह्मणोंको दक्षिणा देना और राजाओंको भेंट देकर विदा करना  »  श्लोक 24-25
 
 
श्लोक  14.89.24-25 
यज्ञवाटे च यत् किंचिद् हिरण्यं सविभूषणम्॥ २४॥
तोरणानि च यूपांश्च घटान् पात्रीस्तथेष्टका:।
युधिष्ठिराभ्यनुज्ञाता: सर्वं तद् व्यभजन् द्विजा:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
यज्ञवेदी में जो भी स्वर्ण या स्वर्ण के आभूषण, तोरण, यूप, घड़े, पात्र और ईंटें थीं, उन्हें भी युधिष्ठिर की अनुमति से ब्राह्मणों ने आपस में बांट लिया।
 
Whatever gold or golden ornaments, arches, yupas, pitchers, vessels and bricks were there in the sacrificial altar were also divided amongst themselves by the brahmins, with the permission of Yudhishthira.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)