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mahabharat 14.89.23-24h: उस अपार स्वर्ण राशि को पाकर पुरोहितों ने बड़े उत्साह और प्रसन्नता के साथ उसे ब्राह्मणों में वितरित कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 14.89: युधिष्ठिरका ब्राह्मणोंको दक्षिणा देना और राजाओंको भेंट देकर विदा करना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 89: युधिष्ठिरका ब्राह्मणोंको दक्षिणा देना और राजाओंको भेंट देकर विदा करना  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  14.89.23-24h 
ऋत्विजस्तमपर्यन्तं सुवर्णनिचयं तथा॥ २३॥
व्यभजन्त द्विजातिभ्यो यथोत्साहं यथासुखम्।
 
 
अनुवाद
उस अपार स्वर्ण राशि को पाकर पुरोहितों ने बड़े उत्साह और प्रसन्नता के साथ उसे ब्राह्मणों में वितरित कर दिया।
 
On getting that infinite amount of gold, the priests distributed it among the Brahmins with great enthusiasm and joy. 23 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)