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mahabharat 14.89.21-22h: विद्वान ऋषि व्यास ने सोना लेकर ब्राह्मणों को दे दिया, जिन्होंने उसे चार भागों में बांटकर आपस में बांट लिया।   |   mahabharat अध्याय 14.89: युधिष्ठिरका ब्राह्मणोंको दक्षिणा देना और राजाओंको भेंट देकर विदा करना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 89: युधिष्ठिरका ब्राह्मणोंको दक्षिणा देना और राजाओंको भेंट देकर विदा करना  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  14.89.21-22h 
प्रतिगृह्य तु तद् रत्नं कृष्णद्वैपायनो मुनि:॥ २१॥
ऋत्विग्भ्य: प्रददौ विद्वांश्चतुर्धाव्यभजंश्च ते।
 
 
अनुवाद
विद्वान ऋषि व्यास ने सोना लेकर ब्राह्मणों को दे दिया, जिन्होंने उसे चार भागों में बांटकर आपस में बांट लिया।
 
The learned sage Vyasa took the gold and gave it to the Brahmins, who divided it into four parts and divided it amongst themselves.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)