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न करिष्यति तल्लोके कश्चिदन्यो नराधिप:॥ २०॥
यत् कृतं कुरुराजेन मरुत्तस्यानुकुर्वता।
अनुवाद
महाराजा मरुत के मार्ग पर चलने वाले राजा युधिष्ठिर ने उस समय ऐसा महान त्याग किया, जैसा इस संसार में कोई अन्य राजा नहीं कर सकेगा।
King Yudhishthira, who followed the path of Maharaja Marut, made such a great sacrifice at that time that no other king in this world will be able to make. 20 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥