Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.86.17: "हे भगवान् कृष्ण! राजा युधिष्ठिर को भी ऐसा ही करना चाहिए। आप भी उन्हें यही अनुमति देकर कहिए कि 'हे राजन! राजाओं के परस्पर द्वेष के कारण ये सब प्रजा पुनः नष्ट न हो जाएँ।'॥17॥ | mahabharat अध्याय 14.86: राजा युधिष्ठिरका भीमसेनको राजाओंकी पूजा करनेका आदेश और श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे अर्जुनका संदेश कहना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कर्तुमर्हति तद् राजा भवांश्चाप्यनुमन्यताम्।
राजद्वेषान्न नश्येयुरिमा राजन् पुन: प्रजा:॥ १७॥
अनुवाद
"हे भगवान् कृष्ण! राजा युधिष्ठिर को भी ऐसा ही करना चाहिए। आप भी उन्हें यही अनुमति देकर कहिए कि 'हे राजन! राजाओं के परस्पर द्वेष के कारण ये सब प्रजा पुनः नष्ट न हो जाएँ।'॥17॥
“Lord Krishna! King Yudhishthira should do the same. You should also give him the same permission and tell him that ‘O King! All these people should not be destroyed again due to the mutual hatred of kings.'॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥