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mahabharat 14.86.16: (ऐसा कहकर उन्होंने मुझसे पुनः कहा—) ‘माननीय! आप मेरी ओर से राजा युधिष्ठिर को सूचित करें कि राजसूय-यज्ञ में अर्घ्य देते समय जो दुर्घटना हुई थी, वह इस बार न हो ॥ 16॥   |   mahabharat अध्याय 14.86: राजा युधिष्ठिरका भीमसेनको राजाओंकी पूजा करनेका आदेश और श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे अर्जुनका संदेश कहना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 86: राजा युधिष्ठिरका भीमसेनको राजाओंकी पूजा करनेका आदेश और श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे अर्जुनका संदेश कहना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  14.86.16 
इत्येतद्वचनाद् राजा विज्ञाप्यो मम मानद।
यथा चात्ययिकं न स्याद् यदर्घ्याहरणेऽभवत्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
(ऐसा कहकर उन्होंने मुझसे पुनः कहा—) ‘माननीय! आप मेरी ओर से राजा युधिष्ठिर को सूचित करें कि राजसूय-यज्ञ में अर्घ्य देते समय जो दुर्घटना हुई थी, वह इस बार न हो ॥ 16॥
 
(“Having said this, he again said to me—) ‘Honorable! On my behalf you must inform King Yudhishthira that the mishap which had occurred during the offering of arghya in the Rajasuya-yagna should not occur this time.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)