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mahabharat 14.86.13: धर्मराज के इस प्रकार पूछने पर वाक्विद् तथा वृष्णि तथा अंधकवंशी यादवों के स्वामी भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मात्मा युधिष्ठिर से इस प्रकार कहा-॥ 13॥   |   mahabharat अध्याय 14.86: राजा युधिष्ठिरका भीमसेनको राजाओंकी पूजा करनेका आदेश और श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे अर्जुनका संदेश कहना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.86.13 
इत्युक्तो धर्मराजेन वृष्ण्यन्धकपतिस्तदा।
प्रोवाचेदं वचो वाग्मी धर्मात्मानं युधिष्ठिरम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
धर्मराज के इस प्रकार पूछने पर वाक्विद् तथा वृष्णि तथा अंधकवंशी यादवों के स्वामी भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मात्मा युधिष्ठिर से इस प्रकार कहा-॥ 13॥
 
On Dharmaraj asking this way, Lord Shri Krishna, the master of speech and master of Vrishni and Andhakavanshi Yadavas, said to the righteous Yudhishthira thus -॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)