vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
»
अध्याय 85: यज्ञभूमिकी तैयारी, नाना देशोंसे आये हुए राजाओंका यज्ञकी सजावट और आयोजन देखना
»
श्लोक 40-41h
श्लोक
14.85.40-41h
तत्र जातिसहस्राणि पुरुषाणां ततस्तत:॥ ४०॥
गृहीत्वा भाजनान् जग्मुर्बहूनि भरतर्षभ।
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! हजारों जातियों के लोग अनेक बर्तन लेकर वहाँ आते थे।
O best of the Bharatas! People from thousands of castes used to come there carrying many vessels. 40 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×