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mahabharat 14.85.32: हे प्रभु! संसार में जितने भी जल या स्थल में उत्पन्न हुए प्राणी देखे या सुने गए थे, वे सब राजाओं ने वहाँ उपस्थित देखे।   |   mahabharat अध्याय 14.85: यज्ञभूमिकी तैयारी, नाना देशोंसे आये हुए राजाओंका यज्ञकी सजावट और आयोजन देखना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.85.32 
स्थलजा जलजा ये च पशव: केचन प्रभो।
सर्वानेव समानीतानपश्यंस्तत्र ते नृपा:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! संसार में जितने भी जल या स्थल में उत्पन्न हुए प्राणी देखे या सुने गए थे, वे सब राजाओं ने वहाँ उपस्थित देखे।
 
O Lord! All the animals that were seen or heard of in the world, born on land or in water, were seen present there by the kings. 32.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)