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mahabharat 14.85.30: घड़े, बरतन, कड़ाही, सुराही और बहुत-से कटोरे भी उनके सामने आए। पृथ्वी के उन राजाओं को वहाँ सोने से बनी कोई वस्तु न दिखाई दी।   |   mahabharat अध्याय 14.85: यज्ञभूमिकी तैयारी, नाना देशोंसे आये हुए राजाओंका यज्ञकी सजावट और आयोजन देखना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.85.30 
घटान् पात्री: कटाहानि कलशान् वर्धमानकान्।
न हि किञ्चिदसौवर्णमपश्यन् वसुधाधिपा:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
घड़े, बरतन, कड़ाही, सुराही और बहुत-से कटोरे भी उनके सामने आए। पृथ्वी के उन राजाओं को वहाँ सोने से बनी कोई वस्तु न दिखाई दी।
 
Pitchers, vessels, pans, pitchers and many bowls also came in their sight. Those kings of the earth did not see any thing there that was not made of gold.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)