श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 85: यज्ञभूमिकी तैयारी, नाना देशोंसे आये हुए राजाओंका यज्ञकी सजावट और आयोजन देखना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  14.85.29 
ददृशुस्तोरणान्यत्र शातकुम्भमयानि ते।
शय्यासनविहारांश्च सुबहून् रत्नसंचयान्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
वहाँ उन्होंने सोने के बने हुए मेहराब, पलंग, आसन, सैरगाह और अनेक रत्नों के ढेर देखे ॥29॥
 
There they saw arches made of gold, beds, seats, promenades and heaps of many gems. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)