श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 85: यज्ञभूमिकी तैयारी, नाना देशोंसे आये हुए राजाओंका यज्ञकी सजावट और आयोजन देखना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  14.85.25 
तत: कृत्वा स्थपतय: शिल्पिनोऽन्ये च ये तदा।
कृत्स्नं यज्ञविधिं राज्ञो धर्मज्ञाय न्यवेदयन्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद थवाई और अन्य कारीगर आए और राजा युधिष्ठिर को बताया कि यज्ञ मंडप का काम पूरा हो गया है।
 
Thereafter the Thavais and other artisans came and informed King Yudhishthira that the work of the Yagya Mandapam was complete.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)