श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 85: यज्ञभूमिकी तैयारी, नाना देशोंसे आये हुए राजाओंका यज्ञकी सजावट और आयोजन देखना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  14.85.19 
तेषां निविशतां तेषु शिविरेषु महात्मनाम्।
नर्दत: सागरस्येव दिवस्पृगभवत् स्वन:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
वहाँ बने हुए विभिन्न शिविरों में प्रवेश करते हुए महामनस्वी राजाओं का कोलाहलपूर्ण शब्द समुद्र की गम्भीर गर्जना के समान सम्पूर्ण आकाश में फैल रहा था॥19॥
 
The uproarious noise made by the great-minded kings entering the various camps built there was like the deep roar of the ocean, spreading across the entire sky.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)