ते प्रियार्थं कुरुपतेराययुर्नृपसत्तम।
रत्नान्यनेकान्यादाय स्त्रियोऽश्वानायुधानि च॥ १८॥
अनुवाद
श्रेष्ठ! निमंत्रण पाकर वे सभी लोग बहुत से रत्न, स्त्रियाँ, घोड़े और नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र लेकर राजा कुरुराज युधिष्ठिर को प्रसन्न करने के लिए वहाँ आये॥18॥
The best! After receiving the invitation, they all came there with many gems, women, horses and different types of weapons to please King Kururaj Yudhishthir. 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥