श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 85: यज्ञभूमिकी तैयारी, नाना देशोंसे आये हुए राजाओंका यज्ञकी सजावट और आयोजन देखना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  14.85.13 
प्रासादशतसम्बाधं मणिप्रवरकुट्टिमम्।
कारयामास विधिवद्धेमरत्नविभूषितम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उस भूमि पर सैकड़ों महल बनाए गए, जिनके फर्श बहुमूल्य रत्नों से जड़े हुए थे। वह यज्ञवेदी स्वर्ण और रत्नों से सुसज्जित थी और उसका निर्माण शास्त्रीय विधि के अनुसार किया गया था।॥13॥
 
Hundreds of palaces were built on that land, the floors of which were studded with precious stones. That sacrificial altar was decorated with gold and gems and its construction was done according to the classical rules.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)