Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.84.9-10: क्षत्रिय धर्म की भावना से युद्ध कर रहे उस राजा से अर्जुन ने कहा, 'वीर! युद्ध करने से कोई लाभ नहीं है। महाराज युधिष्ठिर ने मुझे राजाओं का वध न करने की आज्ञा दी है। अतः तुम युद्ध से निवृत्त हो जाओ, ताकि आज तुम्हारी पराजय न हो।'॥9-10॥ | mahabharat अध्याय 14.84: शकुनिपुत्रकी पराजय । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तं युध्यमानं राजानं क्षत्रधर्मे व्यवस्थितम्॥ ९॥
पार्थोऽब्रवीन्न मे वध्या राजानो राजशासनात्।
अलं युद्धेन ते वीर न तेऽस्त्वद्य पराजय:॥ १०॥
अनुवाद
क्षत्रिय धर्म की भावना से युद्ध कर रहे उस राजा से अर्जुन ने कहा, 'वीर! युद्ध करने से कोई लाभ नहीं है। महाराज युधिष्ठिर ने मुझे राजाओं का वध न करने की आज्ञा दी है। अतः तुम युद्ध से निवृत्त हो जाओ, ताकि आज तुम्हारी पराजय न हो।'॥9-10॥
Arjuna said to that king who was fighting the war in the spirit of Kshatriya Dharma, 'Valiant! There is no benefit in fighting the war. Maharaja Yudhishthira has ordered me not to kill kings. Therefore, you should retire from the war so that you are not defeated today.'॥ 9-10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥