Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.84.24: अब हमें ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए। हमारा आपसी बैर शांत हो जाए। अब तुम हमारे विरुद्ध युद्ध करने की कभी कल्पना भी न करना। आगामी चैत्र पूर्णिमा को महाराज युधिष्ठिर का अश्वमेध यज्ञ होने वाला है। तुम उसमें अवश्य सम्मिलित हो। | mahabharat अध्याय 14.84: शकुनिपुत्रकी पराजय । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैवं भू: शाम्यतां वैरं मा ते भूद् बुद्धिरीदृशी।
गच्छेथास्त्वं परां चैत्रीमश्वमेधे नृपस्य न:॥ २४॥
अनुवाद
अब हमें ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए। हमारा आपसी बैर शांत हो जाए। अब तुम हमारे विरुद्ध युद्ध करने की कभी कल्पना भी न करना। आगामी चैत्र पूर्णिमा को महाराज युधिष्ठिर का अश्वमेध यज्ञ होने वाला है। तुम उसमें अवश्य सम्मिलित हो।
‘Now we should not behave like this. Let our mutual enmity be pacified. Now you should never think of starting a war against us. ‘On the coming Chaitrama Purnima, Maharaja Yudhishthira's Ashwamedha Yagna is going to be performed. You must attend it.'
इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अनुगीतापर्वणि अश्वानुसरणे शकुनिपुत्रपराजये चतुरशीतितमोऽध्याय:॥ ८४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अनुगीतापर्वमें अश्वानुसरणके प्रसंगमें शकुनिपुत्रकी पराजयविषयक चौरासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥