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श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 84: शकुनिपुत्रकी पराजय  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  14.84.20 
सा न्यवारयदव्यग्रं तं पुत्रं युद्धदुर्मदम्।
प्रसादयामास च तं जिष्णुमक्लिष्टकारिणम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
आते ही उन्होंने अपने अशांत और युद्धोन्मादी पुत्र को युद्ध करने से रोक दिया और बिना किसी प्रयास के ही महान् कर्मों को जीतने वाले अर्जुन को मधुर वचनों से प्रसन्न कर दिया।
 
As soon as he arrived, he stopped his restless and battle-crazy son from fighting and without any effort pleased the great-deed-winning Arjuna with sweet words.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)