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mahabharat 14.84.12: तब अर्जुन ने, जो अत्यन्त आत्मविश्वास से युक्त थे, शकुनिपुत्र का मुकुट अर्धचन्द्राकार बाण से काट डाला, ठीक उसी प्रकार जैसे उन्होंने जयद्रथ का सिर काटा था।   |   mahabharat अध्याय 14.84: शकुनिपुत्रकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 84: शकुनिपुत्रकी पराजय  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  14.84.12 
तस्य पार्थ: शिरस्त्राणमर्धचन्द्रेण पत्रिणा।
अपाहरदमेयात्मा जयद्रथशिरो यथा॥ १२॥
 
 
अनुवाद
तब अर्जुन ने, जो अत्यन्त आत्मविश्वास से युक्त थे, शकुनिपुत्र का मुकुट अर्धचन्द्राकार बाण से काट डाला, ठीक उसी प्रकार जैसे उन्होंने जयद्रथ का सिर काटा था।
 
Then Arjuna, endowed with immeasurable self-confidence, cut off the helmet of Shakuni's son with a crescent-shaped arrow, just as he had beheaded Jaydratha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)