Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.84.1: वैशम्पायन कहते हैं, 'जनमेजय! शकुनिपुत्र गांधारों में सबसे बड़ा योद्धा और महारथी था। विशाल सेना से घिरा हुआ वह निद्रा पर विजय प्राप्त कर चुके अर्जुन का सामना करने गया।'   |   mahabharat अध्याय 14.84: शकुनिपुत्रकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 84: शकुनिपुत्रकी पराजय  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  14.84.1 
वैशम्पायन उवाच
शकुनेस्तनयो वीरो गान्धाराणां महारथ:।
प्रत्युद्ययौ गुडाकेशं सैन्येन महता वृत:॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं, 'जनमेजय! शकुनिपुत्र गांधारों में सबसे बड़ा योद्धा और महारथी था। विशाल सेना से घिरा हुआ वह निद्रा पर विजय प्राप्त कर चुके अर्जुन का सामना करने गया।'
 
Vaishampayana says, 'Janamejaya! Shakunika's son was the greatest warrior and great car-warrior among the Gandharas. Surrounded by a huge army, he went to face Arjuna who had conquered sleep.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)