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तब मुकुटधारी अर्जुन और शकुनि के पुत्र, गांधार के राजा, जो अपनी पूर्व शत्रुता निभा रहा था, के बीच भयंकर युद्ध हुआ।
Then a fierce battle took place between the crown-wearing Arjuna and Shakuni's son, the king of Gandhara, who was carrying on with his previous enmity.
इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अनुगीतापर्वणि अश्वानुसरणे त्र्यशीतितमोऽध्याय:॥ ८३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अनुगीतापर्वमें यज्ञसम्बन्धी अश्वका अनुसरणविषयक तिरासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥