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mahabharat 14.83.12-13h: सौम्य वीरता से उन सबको जीतकर वह घोड़े की इच्छानुसार उसके पीछे चलने को विवश हो गया और सौराष्ट्र, गोकर्ण और प्रभास क्षेत्रों में चला गया।   |   mahabharat अध्याय 14.83: दक्षिण और पश्चिम समुद्रके तटवर्ती देशोंमें होते हुए अश्वका द्वारका, पञ्चनद एवं गान्धार देशमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 83: दक्षिण और पश्चिम समुद्रके तटवर्ती देशोंमें होते हुए अश्वका द्वारका, पञ्चनद एवं गान्धार देशमें प्रवेश  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  14.83.12-13h 
तांश्चापि विजयो जित्वा नातितीव्रेण कर्मणा।
तुरङ्गमवशेनाथ सुराष्ट्रानभितो ययौ॥ १२॥
गोकर्णमथ चासाद्य प्रभासमपि जग्मिवान्।
 
 
अनुवाद
सौम्य वीरता से उन सबको जीतकर वह घोड़े की इच्छानुसार उसके पीछे चलने को विवश हो गया और सौराष्ट्र, गोकर्ण और प्रभास क्षेत्रों में चला गया।
 
Having conquered them all by gentle valour, he was forced to follow the horse as per its wish and went to Saurashtra, Gokarna and Prabhas regions. 12 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)