श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 82: मगधराज मेघसन्धिकी पराजय  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  14.82.29 
ततो यथेष्टमगमत् पुनरेव स केसरी।
तत: समुद्रतीरेण वङ्गान् पुण्ड्रान् सकोसलान्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वह घोड़ा पुनः अपनी इच्छानुसार आगे बढ़ा और समुद्र के किनारे-किनारे चलता हुआ वंग, पुण्ड्र और कोसल आदि देशों में चला गया॥ 29॥
 
Thereafter the horse again moved forward according to its wish. Going along the sea shore it went to the countries like Vanga, Pundra and Kosala etc.॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)