श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 82: मगधराज मेघसन्धिकी पराजय  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  14.82.22 
विरथं विधनुष्कं च गदया परिवर्जितम्।
सान्त्वपूर्वमिदं वाक्यमब्रवीत् कपिकेतन:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जब मेघसन्धि का रथ, धनुष और गदा छिन गई, तब ध्वजवाहक वानर अर्जुन ने उसे इस प्रकार सान्त्वना दी -॥22॥
 
When Meghsandhi was deprived of his chariot, bow and mace, then the flag-bearer of the ape, Arjuna, consoled him by saying this -॥22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)