श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 82: मगधराज मेघसन्धिकी पराजय  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  14.82.2 
अनुगच्छंश्च तुरगं निवृत्तोऽथ किरीटभृत् ।
यदृच्छया समापेदे पुरं राजगृहं तदा॥ २॥
 
 
अनुवाद
किरीटधारी अर्जुन भी घोड़े के पीछे-पीछे चले और भगवान की इच्छा से वे राजगृह नामक नगर में पहुँचे॥ 2॥
 
The crown-wearing Arjuna also followed the horse and by the will of God he reached the city called Rajagriha.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)