vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
»
अध्याय 82: मगधराज मेघसन्धिकी पराजय
»
श्लोक 18
श्लोक
14.82.18
धनुश्चास्य महच्चित्रं क्षुरेण प्रचकर्त ह।
हस्तावापं पताकां च ध्वजं चास्य न्यपातयत्॥ १८॥
अनुवाद
फिर उसने छुरे से उसका विशाल और विचित्र धनुष काट डाला तथा उसके दस्ताने, ध्वजा और ध्वजा भी काटकर भूमि पर फेंक दिए॥18॥
Then he cut off his huge and strange bow with a razor's knife and also cut down his gloves, banner and standard and threw them on the ground.॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×