श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 82: मगधराज मेघसन्धिकी पराजय  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  14.82.18 
धनुश्चास्य महच्चित्रं क्षुरेण प्रचकर्त ह।
हस्तावापं पताकां च ध्वजं चास्य न्यपातयत्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
फिर उसने छुरे से उसका विशाल और विचित्र धनुष काट डाला तथा उसके दस्ताने, ध्वजा और ध्वजा भी काटकर भूमि पर फेंक दिए॥18॥
 
Then he cut off his huge and strange bow with a razor's knife and also cut down his gloves, banner and standard and threw them on the ground.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)