vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
»
अध्याय 82: मगधराज मेघसन्धिकी पराजय
»
श्लोक 17
श्लोक
14.82.17
सव्यसाची तु संक्रुद्धो विकृष्य बलवद् धनु:।
हयांश्चकार निर्जीवान् सारथेश्च शिरोऽहरत्॥ १७॥
अनुवाद
अब अर्जुन का क्रोध और बढ़ गया। उसने बलपूर्वक अपना धनुष खींचकर मेघसन्धि के घोड़ों को मार डाला और उसके सारथि का सिर भी काट डाला।
Now Arjuna's anger increased. He pulled his bow with force and killed Meghasandhi's horses and beheaded his charioteer as well.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×