श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 82: मगधराज मेघसन्धिकी पराजय  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  14.82.16 
अवध्यमान: सोऽभ्यघ्नन्मागध: पाण्डवर्षभम्।
तेन तस्थौ स कौरव्य लोकवीरस्य दर्शने॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुपुत्र! अर्जुन उसे मार नहीं रहा था, अपितु वह पाण्डवों के रत्न पर बार-बार प्रहार कर रहा था। इसीलिए वह उस समय तक विश्वविख्यात योद्धा अर्जुन की दृष्टि में बना रह सका।
 
O son of Kuru! Arjuna was not killing him, but he was repeatedly attacking the jewel of the Pandavas. That is why he could remain in the sight of the world-renowned warrior Arjuna till then.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)