अवध्यमान: सोऽभ्यघ्नन्मागध: पाण्डवर्षभम्।
तेन तस्थौ स कौरव्य लोकवीरस्य दर्शने॥ १६॥
अनुवाद
हे कुरुपुत्र! अर्जुन उसे मार नहीं रहा था, अपितु वह पाण्डवों के रत्न पर बार-बार प्रहार कर रहा था। इसीलिए वह उस समय तक विश्वविख्यात योद्धा अर्जुन की दृष्टि में बना रह सका।
O son of Kuru! Arjuna was not killing him, but he was repeatedly attacking the jewel of the Pandavas. That is why he could remain in the sight of the world-renowned warrior Arjuna till then.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥