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श्री महाभारत
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पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
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अध्याय 81: उलूपीका अर्जुनके पूछनेपर अपने आगमनका कारण एवं अर्जुनकी पराजयका रहस्य बताना, पुत्र और पत्नीसे विदा लेकर पार्थका पुन: अश्वके पीछे जाना
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श्लोक 4
श्लोक
14.81.4
कच्चिन्नु राजपुत्री ते सपत्नी चैत्रवाहनी।
चित्राङ्गदा वरारोहा नापराध्यति किंचन॥ ४॥
अनुवाद
क्या आपकी सहपत्नी चित्रवाहन की पुत्री, राजकुमार वररोह की पुत्री चित्रांगदा ने आपके प्रति कोई अपराध नहीं किया है?॥4॥
Has your co-wife, Chitravahan's daughter, Chitrangada, the daughter of prince Vararoha, not done any crime against you?॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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