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mahabharat 14.81.32: तत्पश्चात् वहाँ बभ्रुवाहन ने भरतवंश के श्रेष्ठ पुरुष इन्द्रकुमार अर्जुन की विधिपूर्वक पूजा की और अपनी दोनों पुत्रियों की अनुमति लेकर वे वहाँ से चले गये ॥32॥   |   mahabharat अध्याय 14.81: उलूपीका अर्जुनके पूछनेपर अपने आगमनका कारण एवं अर्जुनकी पराजयका रहस्य बताना, पुत्र और पत्नीसे विदा लेकर पार्थका पुन: अश्वके पीछे जाना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 81: उलूपीका अर्जुनके पूछनेपर अपने आगमनका कारण एवं अर्जुनकी पराजयका रहस्य बताना, पुत्र और पत्नीसे विदा लेकर पार्थका पुन: अश्वके पीछे जाना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  14.81.32 
स तत्र विधिवत् तेन पूजित: पाकशासनि:।
भार्याभ्यामभ्यनुज्ञात: प्रायाद् भरतसत्तम:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वहाँ बभ्रुवाहन ने भरतवंश के श्रेष्ठ पुरुष इन्द्रकुमार अर्जुन की विधिपूर्वक पूजा की और अपनी दोनों पुत्रियों की अनुमति लेकर वे वहाँ से चले गये ॥32॥
 
Thereafter, there Babhruvahana duly worshiped Indra Kumar Arjun, the best man of Bharat dynasty and he left from there after taking the permission of his two daughters. 32॥
 
इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अनुगीतापर्वणि अश्वानुसरणे एकाशीतितमोऽध्याय:॥ ८१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अनुगीतापर्वमें अश्वका अनुसरणविषयक इक्यासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८१॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)