श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 81: उलूपीका अर्जुनके पूछनेपर अपने आगमनका कारण एवं अर्जुनकी पराजयका रहस्य बताना, पुत्र और पत्नीसे विदा लेकर पार्थका पुन: अश्वके पीछे जाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  14.81.3 
कच्चित् ते पृथुलश्रोणि नाप्रियं प्रियदर्शने।
अकार्षमहमज्ञानादयं वा बभ्रुवाहन:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे स्थूल नितम्बों वाली प्रिये! क्या मैंने या इस बभ्रुवाहन ने अनजाने में तुम्हारा कुछ अनिष्ट किया है?॥3॥
 
O dear one with thick buttocks! Have I or this Babhruvahan done any harm to you unknowingly?॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)