श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 81: उलूपीका अर्जुनके पूछनेपर अपने आगमनका कारण एवं अर्जुनकी पराजयका रहस्य बताना, पुत्र और पत्नीसे विदा लेकर पार्थका पुन: अश्वके पीछे जाना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  14.81.29 
इत्युक्त: स तु पुत्रेण तदा वानरकेतन:।
स्मयन् प्रोवाच कौन्तेयस्तदा चित्राङ्गदासुतम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
अपने पुत्र की यह बात सुनकर कुन्तीनन्दन कपिध्वज अर्जुन ने हँसते हुए चित्रांगदा कुमार से कहा- 29॥
 
On hearing this from his son, Kuntinandan Kapidhwaj Arjun said smilingly to Chitrangada Kumar - 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)