vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
»
अध्याय 81: उलूपीका अर्जुनके पूछनेपर अपने आगमनका कारण एवं अर्जुनकी पराजयका रहस्य बताना, पुत्र और पत्नीसे विदा लेकर पार्थका पुन: अश्वके पीछे जाना
»
श्लोक 29
श्लोक
14.81.29
इत्युक्त: स तु पुत्रेण तदा वानरकेतन:।
स्मयन् प्रोवाच कौन्तेयस्तदा चित्राङ्गदासुतम्॥ २९॥
अनुवाद
अपने पुत्र की यह बात सुनकर कुन्तीनन्दन कपिध्वज अर्जुन ने हँसते हुए चित्रांगदा कुमार से कहा- 29॥
On hearing this from his son, Kuntinandan Kapidhwaj Arjun said smilingly to Chitrangada Kumar - 29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×