श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 81: उलूपीका अर्जुनके पूछनेपर अपने आगमनका कारण एवं अर्जुनकी पराजयका रहस्य बताना, पुत्र और पत्नीसे विदा लेकर पार्थका पुन: अश्वके पीछे जाना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  14.81.26 
उपयास्यामि धर्मज्ञ भवत: शासनादहम्।
अश्वमेधे महायज्ञे द्विजातिपरिवेषक:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
धर्मज्ञ! आपकी अनुमति से मैं अवश्य ही अश्वमेध यज्ञ में सम्मिलित होऊँगा और ब्राह्मणों को भोजन कराऊँगा॥ 26॥
 
Dharmagya! With your permission, I will certainly attend the Ashwamedha Yagya and will serve food to the Brahmins.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)