श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 81: उलूपीका अर्जुनके पूछनेपर अपने आगमनका कारण एवं अर्जुनकी पराजयका रहस्य बताना, पुत्र और पत्नीसे विदा लेकर पार्थका पुन: अश्वके पीछे जाना  »  श्लोक 23-24
 
 
श्लोक  14.81.23-24 
युधिष्ठिरस्याश्वमेध: परिचैत्रीं भविष्यति॥ २३॥
तत्रागच्छे: सहामात्यो मातृभ्यां सहितो नृप॥ २४॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! आगामी चैत्र मास की पूर्णिमा के दिन महाराज युधिष्ठिर का यज्ञ प्रारम्भ होगा। आप अपनी दोनों माताओं और मन्त्रियों सहित वहाँ अवश्य पधारें।
 
Nareshwar! On the full moon day of the upcoming Chaitra month, the yagya of Maharaj Yudhishthir will begin. You must come there with your two mothers and ministers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)