श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 81: उलूपीका अर्जुनके पूछनेपर अपने आगमनका कारण एवं अर्जुनकी पराजयका रहस्य बताना, पुत्र और पत्नीसे विदा लेकर पार्थका पुन: अश्वके पीछे जाना  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  14.81.22-23h 
सर्वं मे सुप्रियं देवि यदेतत् कृतवत्यसि।
इत्युक्त्वा सोऽब्रवीत् पुत्रं मणिपूरपतिं जय:॥ २२॥
चित्राङ्गदाया: शृण्वत्या: कौरव्यदुहितुस्तदा।
 
 
अनुवाद
"देवी! आपने जो कुछ किया है, वह मुझे अत्यन्त प्रिय है।" ऐसा कहकर चित्रांगदा और उलूपी की बातें सुनकर अर्जुन ने अपने पुत्र मणिपुर के राजा बभ्रुवाहन से कहा -॥22 1/2॥
 
"Devi! Whatever you have done is very dear to me." Having said this, Arjuna, while listening to Chitrangada and Ulupi, said to his son, the King of Manipur, Babhruvahana -॥ 22 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)