श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 81: उलूपीका अर्जुनके पूछनेपर अपने आगमनका कारण एवं अर्जुनकी पराजयका रहस्य बताना, पुत्र और पत्नीसे विदा लेकर पार्थका पुन: अश्वके पीछे जाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  14.81.2 
कच्चित् कुशलकामासि राज्ञोऽस्य भुजगात्मजे।
मम वा चपलापाङ्गि कच्चित् त्वं शुभमिच्छसि॥ २॥
 
 
अनुवाद
नागकुमारी! तुम इस राजा बभ्रुवाहन का कल्याण चाहती हो न? हे चंचल व्यंग्य करने वाली सुन्दरी! तुम मेरा भी कल्याण चाहती हो न?॥2॥
 
Nagakumari! You wish for the well-being of this King Babruvahan, don't you? Beautiful lady with playful sarcasm! You wish for my well-being too, don't you?॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)