श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 81: उलूपीका अर्जुनके पूछनेपर अपने आगमनका कारण एवं अर्जुनकी पराजयका रहस्य बताना, पुत्र और पत्नीसे विदा लेकर पार्थका पुन: अश्वके पीछे जाना  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  14.81.17-18 
पुत्रस्तस्य महाभाग मणिपूरेश्वरो युवा॥ १७॥
स एनं रणमध्यस्थ: शरै: पातयिता भुवि।
एवं कृते स नागेन्द्र मुक्तशापो भविष्यति॥ १८॥
 
 
अनुवाद
"हे नागराज! मणिपुर के युवा राजा बभ्रुवाहन अर्जुन के पुत्र हैं। जब वे युद्धभूमि में खड़े होकर अपने बाणों से उन्हें भूमि पर गिरा देंगे, तब अर्जुन हमारे श्राप से मुक्त हो जाएँगे।"
 
“O great king of snakes! The young king of Manipur, Babruvahan, is Arjuna's son. When he stands on the battlefield and makes them fall to the ground with his arrows, then Arjuna will be freed from our curse.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)