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mahabharat 14.81.15-16h: उनके वचन सुनकर मेरी सारी इन्द्रियाँ व्याकुल हो गईं और पाताल में जाकर मैंने अपने पिता को यह सब समाचार सुनाया। मेरे पिता भी यह सुनकर बहुत दुःखी हुए॥15 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 14.81: उलूपीका अर्जुनके पूछनेपर अपने आगमनका कारण एवं अर्जुनकी पराजयका रहस्य बताना, पुत्र और पत्नीसे विदा लेकर पार्थका पुन: अश्वके पीछे जाना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 81: उलूपीका अर्जुनके पूछनेपर अपने आगमनका कारण एवं अर्जुनकी पराजयका रहस्य बताना, पुत्र और पत्नीसे विदा लेकर पार्थका पुन: अश्वके पीछे जाना  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  14.81.15-16h 
तदहं पितुरावेद्य प्रविश्य व्यथितेन्द्रिया॥ १५॥
अभवं स च तच्छ्रुत्वा विषादमगमत् परम्।
 
 
अनुवाद
उनके वचन सुनकर मेरी सारी इन्द्रियाँ व्याकुल हो गईं और पाताल में जाकर मैंने अपने पिता को यह सब समाचार सुनाया। मेरे पिता भी यह सुनकर बहुत दुःखी हुए॥15 1/2॥
 
On hearing his words all my senses became distressed and after entering the netherworld I told all this news to my father. My father too was very sad on hearing this.॥ 15 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)