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mahabharat 14.81.14-15h: "भाविनी! ये शान्तनु नंदन भीष्म युद्ध में अन्य लोगों के साथ उलझे हुए थे। अर्जुन से युद्ध न करते हुए भी सव्यसाची अर्जुन ने उनका वध कर दिया। इसी अपराध के कारण आज हम अर्जुन को शाप देना चाहते हैं।" यह सुनकर गंगाजी बोलीं- 'हाँ, ऐसा ही होना चाहिए।'   |   mahabharat अध्याय 14.81: उलूपीका अर्जुनके पूछनेपर अपने आगमनका कारण एवं अर्जुनकी पराजयका रहस्य बताना, पुत्र और पत्नीसे विदा लेकर पार्थका पुन: अश्वके पीछे जाना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 81: उलूपीका अर्जुनके पूछनेपर अपने आगमनका कारण एवं अर्जुनकी पराजयका रहस्य बताना, पुत्र और पत्नीसे विदा लेकर पार्थका पुन: अश्वके पीछे जाना  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  14.81.14-15h 
एष शान्तनवो भीष्मो निहत: सव्यसाचिना।
अयुध्यमान: संग्रामे संसक्तोऽन्येन भाविनि।
तदनेनानुषङ्गेण वयमद्य धनंजयम्॥ १४॥
शापेन योजयामेति तथास्त्विति च साब्रवीत् ।
 
 
अनुवाद
"भाविनी! ये शान्तनु नंदन भीष्म युद्ध में अन्य लोगों के साथ उलझे हुए थे। अर्जुन से युद्ध न करते हुए भी सव्यसाची अर्जुन ने उनका वध कर दिया। इसी अपराध के कारण आज हम अर्जुन को शाप देना चाहते हैं।" यह सुनकर गंगाजी बोलीं- 'हाँ, ऐसा ही होना चाहिए।'
 
“Bhavini! This Shantanu Nandan Bhishma was entangled with others in the war. Even though he was not fighting with Arjun, Savyasachi Arjun killed him. Due to this crime, we want to curse Arjun today.” Hearing this, Gangaji said – ‘Yes, this is what should happen’.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)