श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 81: उलूपीका अर्जुनके पूछनेपर अपने आगमनका कारण एवं अर्जुनकी पराजयका रहस्य बताना, पुत्र और पत्नीसे विदा लेकर पार्थका पुन: अश्वके पीछे जाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  14.81.13 
आप्लुत्य देवा वसव: समेत्य च महानदीम्।
इदमूचुर्वचो घोरं भागीरथ्या मते तदा॥ १३॥
 
 
अनुवाद
‘वसु नामक देवताओं ने महान् गंगाजी के तट पर एकत्र होकर स्नान करके भागीरथी की सलाह से ये भयंकर वचन कहे-॥13॥
 
‘The gods named Vasus, after gathering on the banks of the great river Ganga and bathing, with the advice of Bhagirathi spoke these terrifying words -॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)