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आप्लुत्य देवा वसव: समेत्य च महानदीम्।
इदमूचुर्वचो घोरं भागीरथ्या मते तदा॥ १३॥
अनुवाद
‘वसु नामक देवताओं ने महान् गंगाजी के तट पर एकत्र होकर स्नान करके भागीरथी की सलाह से ये भयंकर वचन कहे-॥13॥
‘The gods named Vasus, after gathering on the banks of the great river Ganga and bathing, with the advice of Bhagirathi spoke these terrifying words -॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥