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mahabharat 14.81.12: बहुत समय पहले की बात है, एक दिन मैं गंगा नदी के तट पर गया था। हे मनुष्यों! वहाँ शान्तनुपुत्र भीष्म के मारे जाने के बाद, वसुओं ने गंगा नदी के तट पर आपके विषय में जो कुछ कहा था, वह मैंने अपने कानों से सुना था॥ 12॥   |   mahabharat अध्याय 14.81: उलूपीका अर्जुनके पूछनेपर अपने आगमनका कारण एवं अर्जुनकी पराजयका रहस्य बताना, पुत्र और पत्नीसे विदा लेकर पार्थका पुन: अश्वके पीछे जाना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 81: उलूपीका अर्जुनके पूछनेपर अपने आगमनका कारण एवं अर्जुनकी पराजयका रहस्य बताना, पुत्र और पत्नीसे विदा लेकर पार्थका पुन: अश्वके पीछे जाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  14.81.12 
पुरा हि श्रुतमेतत् ते वसुभि: कथितं मया।
गङ्गायास्तीरमाश्रित्य हते शान्तनवे नृप॥ १२॥
 
 
अनुवाद
बहुत समय पहले की बात है, एक दिन मैं गंगा नदी के तट पर गया था। हे मनुष्यों! वहाँ शान्तनुपुत्र भीष्म के मारे जाने के बाद, वसुओं ने गंगा नदी के तट पर आपके विषय में जो कुछ कहा था, वह मैंने अपने कानों से सुना था॥ 12॥
 
It happened long ago, one day I went to the bank of river Ganga. O Lord of men! After Shantanu's son Bhishma was killed there, I heard with my own ears what the Vasus had said about you on the bank of river Ganga.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)