Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.81.11: महामते! हे पृथ्वीपाल! पूर्वकाल में वसुओं और गंगाजी ने इस रूप में पाप को शांत करने का निश्चय किया था; जो तुम्हें अपने पुत्र से पराजय के रूप में प्राप्त हुआ है॥ 11॥ | mahabharat अध्याय 14.81: उलूपीका अर्जुनके पूछनेपर अपने आगमनका कारण एवं अर्जुनकी पराजयका रहस्य बताना, पुत्र और पत्नीसे विदा लेकर पार्थका पुन: अश्वके पीछे जाना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महामते! हे पृथ्वीपाल! पूर्वकाल में वसुओं और गंगाजी ने इस रूप में पाप को शांत करने का निश्चय किया था; जो तुम्हें अपने पुत्र से पराजय के रूप में प्राप्त हुआ है॥ 11॥
Mahamate! O Prithvipal! In the past, the Vasus and Gangaji had decided to pacify the sin in this form; which you have received in the form of defeat from your son.॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥